गाजीपुर में ब्राह्मण-यादव संघर्ष चाहते हैं अखिलेश यादव : मंत्री ओम प्रकाश राजभर

✍️By: Nation Now Samachar Desk
गाजीपुर में ब्राह्मण-यादव संघर्ष चाहते हैं अखिलेश यादव : मंत्री ओम प्रकाश राजभर

रिपोर्टर आशुतोष मिश्र सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के दौर में प्रवेश कर गई है। कैबिनेट मंत्री एवं पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह ब्राह्मण और यादव समुदाय के बीच जातिगत संघर्ष को बढ़ावा देना चाहते हैं सुल्तानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अखिलेश यादव लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनसे समाज में तनाव और टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि गाजीपुर में दिए गए बयानों के माध्यम से जातिगत भावनाओं को भड़काने की कोशिश की जा रही है।

राजभर ने यह भी कहा कि हाल ही में सामने आए एक मामले को लेकर राजनीतिक रूप से गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उनके अनुसार, जिस घटना को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह एक “प्रेम प्रपंच” से जुड़ा मामला है, जबकि इसे दुष्कर्म और हत्या का रूप देकर जातिगत हिंसा भड़काने की कोशिश की जा रही है।उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि अखिलेश यादव इस तरह के मामलों को जातीय दृष्टिकोण से जोड़कर समाज में गलत संदेश दे रहे हैं। राजभर का कहना है कि इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है और लोगों के बीच अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछले तीन दशकों से सत्ता में रहने के बावजूद महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीर नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रवैया हमेशा से विरोधात्मक रहा है और वह जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका नहीं निभाती।

इस दौरान ओमप्रकाश राजभर ने यह भी दावा किया कि लोकसभा और राज्यसभा में पारित महिला आरक्षण बिल ऐतिहासिक कदम है, लेकिन कुछ राजनीतिक दल इसे लेकर भी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर सभी दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए।

मंत्री ने यह भी टिप्पणी की कि जिन मामलों में किसी विशेष समुदाय के लोग आरोपी होते हैं, वहां राजनीतिक नेता अक्सर पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं जाते। उन्होंने इसे भी दोहरे रवैये का उदाहरण बताया।

कार्यक्रम में कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे, जहां मंत्री का जोरदार स्वागत किया गया। बैठक में पंचायत व्यवस्था और हाईकोर्ट से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि अदालत के निर्देशों के अनुसार ही पंचायतों का संचालन किया जाएगा और कानून का पालन सर्वोपरि रहेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश में पहले से ही जातीय समीकरण राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं, ऐसे में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।

फिलहाल इस बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।यह पूरा मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक मुद्दे कितने संवेदनशील हैं और कैसे बयानबाजी के जरिए राजनीतिक तापमान बढ़ जाता है।

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