Shubhanshu Shukla ISS docking: Ax-4 मिशन के तहत स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल ने ISS से सफलतापूर्वक की डॉकिंग

Shubhanshu Shukla ISS docking: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा अब अंतिम पड़ाव तक पहुंच चुकी है। वे Ax-4 मिशन के तहत स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल में सवार होकर 12 जून को अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे, और अब उनका यान ISS (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) से 20 मिनट पहले ही सफलतापूर्वक डॉक हो गया है।
यह पूरा मिशन 28,000 किमी/घंटा की रफ्तार और 418 किमी की ऊंचाई पर चल रहा है। लॉन्च के बाद करीब 26 घंटे की यात्रा में ड्रैगन कैप्सूल ने कई कक्षीय बदलाव (orbital maneuvers) किए ताकि वह ISS के साथ सटीक तरीके से संरेखित हो सके।
🚀 डॉकिंग प्रक्रिया: चार सटीक चरण
इस डॉकिंग प्रोसेस को स्पेसएक्स और नासा ने बेहद आधुनिक और सुरक्षित तरीके से डिज़ाइन किया है। इसमें प्रमुख 4 चरण शामिल हैं:
- रेंडेजवू (Rendezvous):
ड्रैगन कैप्सूल ने इंजन फायरिंग से खुद को 400 मीटर नीचे और 7 किमी पीछे से स्टार्ट कर 200 मीटर की दूरी पर पहुंचाया। इस फेज में सिस्टम की जांच हुई। - नजदीकी संपर्क (Close Approach):
200 मीटर की दूरी से ISS के साथ सीधा कम्युनिकेशन शुरू होता है और क्रू 6 घंटे तक सुरक्षित पथ पर रह सकता है। - अंतिम संपर्क (Final Approach):
20 मीटर की दूरी पर लेजर सेंसर, कैमरे और GPS की मदद से ड्रैगन, ISS के हार्मनी मॉड्यूल से जुड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। शुभांशु शुक्ला इस दौरान यान के एवियोनिक्स, प्रणोदन और गति की बारीकी से निगरानी कर रहे थे। - सॉफ्ट और हार्ड कैप्चर:
- Soft Capture: मैग्नेट्स की मदद से यान डॉकिंग पोर्ट से जुड़ता है।
- Hard Capture: मैकेनिकल लैच और हुक द्वारा यान को स्थिर किया जाता है, जिससे पूर्ण सीलिंग हो जाती है।
🔧 जांच और प्रवेश
डॉकिंग के बाद, 1-2 घंटे की जांच होती है ताकि यह तय किया जा सके कि हवा का कोई रिसाव नहीं है और दबाव स्थिर है। इसके बाद शुभांशु और अन्य क्रू मेंबर ISS में प्रवेश करेंगे।
🇮🇳 भारत की ओर से एक नया अध्याय
शुभांशु शुक्ला का यह मिशन केवल भारत के लिए एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैज्ञानिक क्षमता, रणनीतिक संकल्प और वैश्विक भागीदारी को भी दर्शाता है।
SOURCE- TIMES OF INDIA
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