इंदौर हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी को जमानत मंजूर, 10 महीने बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ

✍️By: Nation Now Samachar Desk
इंदौर हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी को जमानत मंजूर, 10 महीने बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ

इंदौर के चर्चित हनीमून मर्डर केस में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को अदालत से जमानत मिल गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को मंजूरी दे दी है, हालांकि अभी तक जमानत आदेश की विस्तृत कॉपी जारी नहीं की गई है।यह मामला पिछले कई महीनों से सुर्खियों में बना हुआ था और अब इस फैसले के बाद इसमें नया मोड़ आ गया है। जानकारी के अनुसार, इस केस में फिलहाल केवल सोनम रघुवंशी ने ही जमानत के लिए आवेदन किया था, जबकि अन्य आरोपियों की ओर से अभी तक कोई याचिका दाखिल नहीं की गई है।

लीगल एड सेल के जरिए दाखिल हुई याचिका

सोनम की ओर से जमानत याचिका ईस्ट खासी हिल्स जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय के लीगल एड सेल के माध्यम से दाखिल की गई थी। उनकी ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि पुलिस जांच पूरी हो चुकी है और मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।इसके साथ ही यह भी कहा गया कि सोनम ने जांच के दौरान पूरा सहयोग किया है और आगे भी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

10 महीने से जेल में थीं बंद

सोनम रघुवंशी पिछले करीब 10 महीनों से जेल में बंद थीं। उनकी ओर से अदालत में यह तर्क भी रखा गया कि लंबे समय तक हिरासत में रखने के कारण उन्हें जमानत से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने इन सभी पहलुओं पर विचार करते हुए जमानत मंजूर कर ली।

रिहाई की तैयारी शुरू

सूत्रों के अनुसार, जमानत मिलने के बाद उनके परिवार के सदस्य—विशेष रूप से उनके पिता और चचेरे भाई—जमानत बांड भरने के लिए शिलांग पहुंच चुके हैं। संभावना जताई जा रही है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा।

केस में नया मोड़

इस फैसले के बाद हनीमून मर्डर केस में एक नया मोड़ आ गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में अन्य आरोपी भी जमानत के लिए आवेदन करते हैं या नहीं।हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं होता। मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम फैसला ट्रायल के बाद ही आएगा।

कानूनी प्रक्रिया जारी

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब जांच पूरी हो जाती है और चार्जशीट दाखिल हो जाती है, तो कई मामलों में अदालत जमानत देने पर विचार करती है, खासकर तब जब आरोपी जांच में सहयोग कर रहा हो और उसके फरार होने की संभावना कम हो।

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