नेशनल हेराल्ड केस: कोर्ट ने सोनिया-राहुल समेत 5 को भेजा नोटिस, 8 मई को होगी अगली सुनवाई- NATIONAL HERALD CASE

✍️By Nation Now Samachar Team
NATIONAL HERALD CASE

नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड मामले में शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (NATIONAL HERALD CASE) में अहम सुनवाई हुई. प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल चार्जशीट के आधार पर कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और अन्य दो व्यक्तियों को नोटिस जारी किया है. इस चार्जशीट में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप शामिल हैं. कोर्ट ने यह नोटिस इसलिए जारी किया है ताकि यह तय किया जा सके कि चार्जशीट को स्वीकार किया जाए या नहीं.

अधिकारियों को सुनना जरूरी: कोर्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट पर संज्ञान लेने से पहले आरोपियों का पक्ष सुनना जरूरी है. कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को अपना पक्ष रखने का अधिकार छीना नहीं जा सकता.

— NATION NOW समाचार (@nnstvlive) May 2, 2025

ED ने जताई सहमति
प्रवर्तन निदेशालय ने भी अदालत के इस फैसले का समर्थन किया और कहा कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है. ईडी ने बताया कि वह चाहती है कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष रूप से हो. एजेंसी ने उदाहरण के रूप में कोयला घोटाले का मामला भी पेश किया, जहां सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को सुने बिना समन जारी करने पर निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.

8 मई को अगली सुनवाई
अब कोर्ट 8 मई को अगली सुनवाई में तय करेगा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा शुरू किया जाए या नहीं. इस सुनवाई में सिर्फ नोटिस का जवाब और वकीलों की दलीलें सुनी जाएंगी, मामले की मेरिट्स पर अभी बहस नहीं होगी.

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
यह मामला कांग्रेस पार्टी से जुड़ी एक पुरानी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुड़ा है, जो नेशनल हेराल्ड अखबार की मालिक है. प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने एक निजी कंपनी ‘यंग इंडियन’ के जरिए AJL की 99 फीसदी हिस्सेदारी केवल 50 लाख रुपये में हासिल कर ली, जबकि उस कंपनी की संपत्ति करीब 2000 करोड़ रुपये की थी.

ED का दावा है कि इस सौदे के पीछे साजिश रची गई थी ताकि AJL की संपत्ति का लाभ निजी तौर पर उठाया जा सके. एजेंसी का यह भी कहना है कि यंग इंडियन कंपनी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नियंत्रण में है और इसका मकसद सिर्फ संपत्ति हड़पना था.

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