Mahoba Teacher Suspended News : कक्षा में ग्रामीण से पैर दबवाने और छात्राओं से मिड-डे मील का काम करवाने वाला शिक्षक निलंबित

Mahoba Teacher Suspended News उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। चरखारी विकासखंड के कम्पोजिट उच्च विद्यालय छानी खुर्द में तैनात एक शिक्षक द्वारा कक्षा के भीतर ग्रामीण से पैर दबवाने और छात्राओं से मध्यान्ह भोजन (Mid Day Meal) से जुड़े कार्य करवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने कड़ा एक्शन लिया है।वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राहुल मिश्रा ने आरोपी शिक्षक जगदीश प्रसाद को निलंबित कर दिया है। साथ ही मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

वायरल वीडियो से मचा था हड़कंप
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ तौर पर देखा गया कि शिक्षक कक्षा के भीतर कुर्सी पर बैठा है और एक ग्रामीण उससे पैर दबवा रहा है। वहीं, दूसरे वीडियो में छात्राएं मध्यान्ह भोजन के लिए सब्जी काटती दिखाई दे रही हैं, जबकि एक व्यक्ति बनियान और अगोंछा पहने विद्यालय परिसर में घूमता नजर आ रहा है।यह दृश्य न केवल विद्यालय अनुशासन के विरुद्ध था, बल्कि छात्रों की गरिमा और अधिकारों पर भी सवाल खड़े करता है।
नोटिस के बावजूद नहीं मिला संतोषजनक जवाब
मामला सामने आने के बाद बीएसए राहुल मिश्रा ने शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। लेकिन शिक्षक द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर विभाग ने तत्काल प्रभाव से शिक्षक को निलंबित कर दिया।
बीएसए ने क्या कहा?
बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा ने बताया कि“विद्यालय में कक्षा के दौरान किसी ग्रामीण से पैर दबवाना मानवीय गरिमा के खिलाफ है। छात्राओं से मध्यान्ह भोजन से जुड़े कार्य करवाना भी विद्यालय नियमों का उल्लंघन है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
विभागीय जांच के आदेश, शिक्षकों में हड़कंप
शिक्षक के निलंबन के साथ ही पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोष सिद्ध होने पर और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।बीएसए की इस सख्ती के बाद महोबा जिले के अन्य विद्यालयों में तैनात लापरवाह शिक्षकों में भी हड़कंप मच गया है।
शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर सरकारी स्कूलों में अनुशासन, निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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