तेज गर्मी में बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा: लू से बचने के लिए अपनाएं ये आसान सावधानियां

देशभर में तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्म हवाओं यानी लू का असर भी तेज होता जा रहा है। ऐसे मौसम में हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो समय पर ध्यान न देने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है। खासकर वे लोग जो दिनभर धूप में काम करते हैं, जैसे मजदूर, यात्री, ट्रैफिक पुलिस या खुले में काम करने वाले लोग, उन्हें अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान अचानक बहुत अधिक बढ़ जाता है और शरीर अपनी प्राकृतिक ठंडक बनाए रखने की क्षमता खो देता है। सामान्य स्थिति में शरीर पसीने के माध्यम से तापमान नियंत्रित करता है, लेकिन अत्यधिक गर्मी में यह प्रक्रिया असंतुलित हो जाती है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने भी गर्मी के मौसम में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण होती है।
हीट स्ट्रोक के लक्षण
हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। इनमें तेज सिर दर्द, चक्कर आना, उल्टी, अत्यधिक पसीना या फिर अचानक पसीना बंद हो जाना, तेज बुखार, कमजोरी, भ्रम की स्थिति और कभी-कभी बेहोशी शामिल हो सकते हैं। यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

हीट स्ट्रोक से बचाव के आसान उपाय
गर्मी के मौसम में कुछ सरल सावधानियों को अपनाकर हीट स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है:दिन के सबसे गर्म समय यानी दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को कपड़े या टोपी से ढककर रखें।दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे। शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे महत्वपूर्ण है।चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे पेय पदार्थों का अधिक सेवन न करें, क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट कर सकते हैं।हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे और गर्मी कम महसूस हो।बाहर काम करते समय हर 15 से 20 मिनट में छांव में आराम करें ताकि शरीर को ठंडक मिल सके।हल्का, सुपाच्य और पानी से भरपूर भोजन जैसे फल, सलाद और दही का सेवन बढ़ाएं।
प्राथमिक उपचार (First Aid)
यदि किसी व्यक्ति में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। सबसे पहले उसे ठंडी और छांव वाली जगह पर ले जाएं। शरीर को ठंडा करने के लिए गीले कपड़े या ठंडी पट्टियां गर्दन, कलाई और पैरों पर रखें। धीरे-धीरे पानी पिलाएं, लेकिन अगर व्यक्ति बेहोश है तो उसे कुछ भी न दें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।स्थिति में सुधार होने पर हल्का और तरल भोजन दिया जा सकता है जैसे जूस या पानी वाले फल।
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